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राखीगढ़ी देश के 15 ‘आइकॉनिक पुरातात्विक स्थलों’ में हुआ शामिल

राखीगढ़ी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यहां पाथ-वे बनाया जाएगा

Satyakhabarindia

 

सत्य खबर हरियाणा

Central Budget 2026-27 : हरियाणा की धरती पर बसी सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे बड़ी पहचान राखीगढ़ी अब एक बार फिर राष्ट्रीय फलक पर है। केंद्रीय बजट में किए गए एलान के बाद राखीगढ़ी को देश के 15 ‘आइकॉनिक पुरातात्विक स्थलों’ की सूची में शामिल करने की घोषणा हुई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में बजट पेश करते हुए इसकी घोषणा की। केंद्रीय बजट में राखीगढ़ी के नाम का उल्लेख होने से क्षेत्रवासियों को इसके तेजी से विकास की उम्मीद बनी है।

इस फैसले के साथ ही राखीगढ़ी केवल खुदाई और शोध का केंद्र नहीं रहेगी, बल्कि इसे संरक्षित पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस पहल मानी जा रही है। केंद्रीय वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को आम लोगों से जोड़ने के लिए चयनित पुरातात्विक स्थलों पर विशेष फोकस किया जाएगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि राखीगढ़ी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यहां पाथ-वे बनाया जाएगा। इसके अलावा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को लोगों तक पहुंचाने के लिए यहां कल्चरल कार्यक्रम किए जाएंगे। इस पहल से दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक सिंधु घाटी के इस केंद्र को अब अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थन में पहचान मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय बजट 2025-26 में राखीगढ़ी को वैश्विक धरोहर केंद्र में बदलने के लिए 500 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया था।

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टूरिज्म के नजरिये से क्या बदलेगा

बजट के बाद राखीगढ़ी में केवल खोदाई स्थल नहीं, बल्कि सुनियोजित पर्यटन ढांचा विकसित करने की योजना है। परिसर के भीतर पाथ-वे बनने से पर्यटकों की आवाजाही आसान होगी। प्रशिक्षित गाइड नियुक्त किए जाएंगे, जो सभ्यता, खुदाई और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की जानकारी देंगे। इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए प्राचीन जीवन-शैली को समझाने का प्रयास किया जाएगा।

क्यों खास है राखीगढ़ी

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राखीगढ़ी को हड़प्पाकालीन सभ्यता की सबसे बड़ी साइट माना जाता है। यहां अब तक हजारों साल पुराने मानव कंकाल, मकानों की दीवारें, कच्ची ईंटें, तांबा, मनके, मोहरें और जल निकासी व्यवस्था के प्रमाण मिल चुके हैं। इन अवशेषों से संकेत मिलता है कि यह नगर सुव्यवस्थित शहरी योजना और तकनीकी समझ के साथ विकसित हुआ था।

साइट से मिले थे 60 कंकाल

नारनौंद उपमंडल के राखीगढ़ी में छह हजार साल पुरानी हड़प्पाकालीन सभ्यता के प्रमाण मिले हैं। यहां से एक साथ 60 कंकाल मिल चुके हैं। खुदाई के दौरान महिलाओं के आभूषण, मिट्टी – पत्थरों पर लिखी पुरानी लिपि, पानी का ड्रेनेज सिस्टम भी मिल चुका है। यहां पर नौ टीले 550 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हुए हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग दिल्ली की टीम यहां लगातार काम कर रही है। एएसआई के अपर महानिदेशक डॉ. संजय कुमार मंजुल की अगुवाई में खुदाई हुई तो इस टीले पर छह हजार वर्ष पुरानी मकान की दीवार, शंख की चूड़ी, कच्ची ईंटें, तांबा, मनके, मोहरें मिली थीं।

राखीगढ़ी हड़प्पाकालीन सभ्यता की सबसे बड़ी साइट

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राखीगढ़ी को हड़प्पाकालीन सभ्यता की सबसे बड़ी साइट माना जाता है। पुरातत्व विभाग ने अब तक पांच टीलों की जमीन को एक्वायर किया है। माना जा रहा है कि यह सभ्यता सरस्वती नदी के किनारे बसी थी। सरस्वती नदी की सहायक नदी दृष्टवती यहां से बहती थी। करीब 28 साल पहले एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) ने यहां खुदाई का फैसला लिया। 1997-98 में अमरेंद्र नाथ की अगुवाई में राखीगढ़ी में टीले नंबर 6 और 7 की खुदाई की गई।

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